Guru's AddaGuru's Adda

Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 60

5 verse-groups

  1. Verses 1–6जैसे देवता लोग स्वर्ग में क्रीडा करते हैं, वैसे ही उस ब्रह्मपद में ही स्थित मनुष्य, गन्धर…
  2. Verses 7–8जिस सामान्यरूप की भावना से जन्तु परितप्त नहीं होता, वह सत्तासामान्यरूप क्या निर्विशेष है…
  3. Verses 9–15आकाशादि कार्यो में अनुस्यूत उस ब्रह्म का ही, सर्वात्मता के प्रदर्शन के लिए, उनकी विभूतिरू…
  4. Verses 16–21वहाँ पर विशेषाकार सत्ता भी वही है, यह कहते हैं। देवताओं में देवतारूप से स्थित है, मनुष्यो…
  5. Verses 22–24शंका हो कि एकरूप यह परमात्मा नानारूप होकर उनमें कैसे स्थित रहता है 2 तो इसका समाधान यह है…