Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, Verse 56
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, verse 56 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
संसारवनखण्डेऽस्मिन्परां शोभामुपागताः ।
जन्मजालकलापूर्णस्तमःकालकृतोदयः ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
अज्ञान में उक्त चन्द्रत्व का उपपादन करते हैँ ।
विवेकरूपी सूर्य के अस्त समय में उदित होनेवाला, जन्मसमूहरूपी कलाओं से परिपूर्ण, निष्प्रपंच
ब्रह्म में प्रकाशित हो रहा दोषों का स्वामी अज्ञानरूपी चन्द्रमा ही संसार का सबसे बढ़कर हेतु है