Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
तदेवापारपर्यन्तमगाधममहात्मनः ।
धियोऽदृश इवाज्ञस्य दीर्घं जठरकोटरात् ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार पक्षिणियाँ पिंजड़े से बाहर निकल नहीं पाती,
वैसे ही उदर भरण में अति-आसक्तिरूपी बन्धन से बधे अन्धपुरुष की नाई अज्ञ पुरुष की बुद्धियाँ
दीर्घसंसाररूपी समुद्र के पार नहीं जा सकतीं