Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 59, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 59, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
को नु भूत्वाऽनुबध्नामि वृत्तिं कथमवाप धीः ।
आद्यमध्यान्तमानानि संकल्पकलनान्यहम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
वह बुद्धि किसी तरह
प्राप्त भी हो जाय, फिर भी “उससे जनित आदि, मध्य, अन्त आदि परिच्छेद ओर संकल्पकल्पनाएँ
आदि ओर अन्त से शून्य ब्रह्माकाश मैं ही हूँ, मुझसे अतिरिक्त वे कुछ भी नहीं है" यो विचार करने पर
ब्रह्मस्वरूप मुझमें इयत्ता (परिच्छिन्नता) ही केसी ?