Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 54, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 54, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 54 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
अनपेक्षफलं ब्रह्म भूत्वा ब्रह्मेति भावितम् ।
क्रियते केवलं कर्म ब्रह्मज्ञेन यथागतम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
पार्थ, जिसे
ब्रह्मज्ञान हो चुका है, वह स्वयं ही - सम्पूर्ण कामनाओं की जिसमें परिसमाप्ति रहती है, ऐसा -
पुरुषार्थरूप ब्रह्मफल बनकर प्रारब्धवश प्राप्त, ब्रह्म" इस भावना से बाधित ही चेष्टारूप कर्म
करता है