Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
तत्क्रमात्संप्रबुद्धस्त्वं ततो ज्ञास्यसि तत्परम् ।
मम रूपमनाद्यन्तं येन भूयो न जायते ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर तुम चित्तशुद्धिक्रम से संप्रबुद्ध होकर परम उत्कृष्ट, आदि और अन्त से रहित मेरे उस रूप को
जान जाओगे, जिसके ज्ञान से प्राणी इस संसार में फिर उत्पन्न नहीं होता