Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
अहन्त्वविषचूर्णेन येषां कायो न मारितः ।
कुर्वन्तोऽपि हरन्तोऽपि न च ते निर्विषूचिकाः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
जिसका शरीर अहन्तारूपी विषचूर्ण से
मारण के लिए व्यापारित नहीं हुआ है, यानी बारबार मरण के हेतुभूत भोगों में लम्पट नहीं हुआ है, ऐसे
रागादिरूपी हैजे से निर्मुक्त योगी लोकिक एवं शास्त्रीय कर्म कर रहे तथा उसके आनुषंगिक फल का
उपभोग कर रहे भी परमार्थतः न तो कर्म कर रहे हैं और न उसके फल का उपभोग ही कर रहे हैं