Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 48, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 48, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 48 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
यदिन्दोस्तेजसो रूपं तद्रूपं शुद्धसंविदः ।
न दृश्यं नोपदेशार्हं नात्यासन्नं न दूरगम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मा का वह शुद्ध चिद्रूप न तो दृष्टि का विषय है और न उपदेश के ही
योम्यहे, न तो अत्यन्त समीप है ओर न दूरवर्ती ही है; किंतु केवल योगियों के अनुभव से ही गम्य है