Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 47, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 47, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 47 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
तथा नानातयोदेति सैवासैवेव ब्रह्मता ।
यैषा रूपविलासानामालोकपरमाणुता ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
नील, पीत आदि चित्र-
विचित्र रूपों में जो यह आलोक परमाणुता यानी सूक्ष्मभूत सत्ता है, वह ब्रह्मसत्तारूप ही है । ब्रह्मसत्ता
भी इन घटादिव्यक्तियों के गुण, गुणी आदिस्वरूप अवान्तर विजातीयता की सिद्धि के लिए उपयुक्त
सत्तारूप हो जाती है