Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 47, Verse 13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 47, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 47 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

पद्मनानादिशब्दार्थस्त्यक्त्वा यद्वच्छिलोदरम् । नाना तद्वदिदं नाना तदेतन्मयमद्वयम् ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

अथवा पद्म आदि शब्दों और उनके नाना अर्थो को शिलोदर से पृथक्‌ करने पर जैसे उनकी कुछ भी सत्ता नहीं रहती, वैसे ही जगत्‌ आदि नाना विकल्पों को चिति से पृथक्‌ करने पर उनका अस्तित्व कुछ भी नहीं रहता, यों तात्पर्य जानिए, यह कहते है। कमल आदि शब्द ओर उनके अनेक अर्थ शिलोदर को छोड़कर जैसे नाना-से प्रतीत होते हैं, वास्तव में शिलोदर से उनका पृथक्‌ अस्तित्व नहीं है, वैसे ही अद्रय चितिशिला को छोडकर यह जगदादिशब्द ओर उनके अर्थ नाना-से भासते हैं; वास्तव में चितिशिलोदर से पृथक्‌ उनका अस्तित्व नहीं है, किंतु चितिशिलामय ही है