Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 46, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 46, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 46 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
तस्यामन्तः प्रफुल्लानि पद्मानि सुबहून्यपि ।
सरस्यामिव रम्याणि तान्यनन्तानि सन्ति वै ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
उस महा-शिला के भीतर मनःकल्पनाओं से अनन्त वे सभी भुवनादिरूप
कमल (<) वैसे विराज रहे हैं, जैसे सरसी में खिले हुए अधिक रमणीय कमल विराजते हे