Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 46, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 46, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 46 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
चिच्छिलैषा मयोक्ता ते यस्यामन्तर्जगन्ति वै ।
घनत्वैकात्मकत्वादिवशादेषा शिलैव चित् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, आपसे उस चितिरूप शिला का ही मैंने कथन किया है, जिसके भीतर ये
सब जगत् विद्यमान हैं। लौकिक शिला के सदृश इसमें निबिड़ता, एकरूपता, अभेद्यता आदि गुण होने
के कारण यह चिति भी एक तरह की शिला ही है