Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 45, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 45, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
इयमुद्दामसौगन्ध्यस्वर्गश्रीपुष्पमञ्जरी ।
जगज्जरठवृक्षस्य रजोनरकमूलिनः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
रजोगुण के कार्य राग आदि से एवं नरकों से
यानी दुःखों से जिसका मूल (जड) बना है, ऐसे जगद्रूप पुराने वृक्ष के उत्कट सुगन्ध से युक्त स्वर्ग-
शोकरूप फूलों की मंजरी यही चितिशक्ति हे