Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 44, Verse 8

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 44, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 44 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

दृश्यते ते स्वभावोऽयं समतासत्यतामयः । मन्ये क्षीणविकल्पोऽसि जातोऽसि हतकालिकः ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

अथवा दूसरों के उपकार के लिए मैंने फिर यह उपदेश दिया है, आपका तो अज्ञान नष्ट हो चुका है, यह मैंने समता आदि हेतुओं से जान ही लिया है, इस आशय से कहते हैं। रामभद्र, यह आपका जो समता एवं सत्यतामय स्वभाव मुझे दिखाई देता है, इससे मैं अनुमान करता हूँ कि आप विकल्परहित और अविद्यारहित हो चुके हैं