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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 41, Verse 36

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 41, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 41 · श्लोक 36

संस्कृत श्लोक

आतिवाहिकदेहोक्तिभाजनं तद्विदुर्बुधाः । अन्तस्थया ब्रह्मशक्त्या ज्ञरूपं स्वात्मनात्मदृक् ॥ ३६ ॥

हिन्दी अर्थ

ज्ञानी लोग उसे ही (मन को ही) “आतिवाहिक देह है" इस उकिति का विषय बतलाते हैं। वही भीतर में स्थित आवरणरहित साक्षीस्वरूप ब्रह्मशक्ति से व्याप्त होकर प्रमातृस्वरूप बन जाता है। और स्वसाक्षी आत्मा की स्वप्रकाशता के बल से आत्मा को जानता हे