Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 41, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 41, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 41 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
क्षणाद्भावितवेद्यत्त्वादहन्तामनुगच्छति ।
पुरुषत्वात्पुमान्स्वप्ने वनवारणतामिव ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
फिर तत्काल ही विषयों में तादात्म्यभावना से अहन्ता को (अहंकाररूप के) उस प्रकार प्राप्त कर
लेती है, जिस प्रकार स्वप्न में पुरुष अपना पुरुषत्वधर्म छोडकर हाथी की भावना से जंगली हाथी
की रूपता को प्राप्त कर लेता है