Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 40, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 40, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 40 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
नियताकारता शान्ते न च संभवतीश्वरे ।
यत्र संकल्प्यते ब्रह्मन्पूज्यपूजामयः क्रमः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्मन्, जिस
परिच्छिन्न आकारवाली मूर्ति में पूज्य, पूजा आदि त्रिपुटी -क्रम की कल्पना की जाती है, उस मूर्ति
आदि परिच्छिन्न संस्थान से (आकृति से) रहित ईश्वर में वह पूज्य, पूजा आदि का क्रम नहीं हो
सकता