Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 40, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 40, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 40 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
सर्वात्मकस्यानन्तस्य शिवस्यान्तः किलात्मनः ।
पूज्यपूजकपूजाख्यो विभ्रमः प्रोदितः कुतः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
यों तात्विक विवार करने पर पूज्य, पूजक आदि सभी त्रिपुटियाँ बाधित हो जाती हैं, यह कहते है ।
सर्वस्वरूप, असीम, कल्याणमय आत्मा के भीतर पूज्य, पूजक और पूजारूप परिच्छेदात्मक
त्रिपुटी का विभ्रम आया कहाँ से ? अर्थात् उक्त त्रिपुटीविभ्रम असत् ही है