Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 40, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 40, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 40 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
शिवं शान्तमनाभासमेकं भास्वरमागतम् ।
जगत्प्रत्ययवत्सर्वमात्मरूपमिदं स्थितम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
शिव, शान्त, अन्य से प्रकाशित न होनेवाला स्वप्रकाश ब्रह्मरूप या प्रत्यगात्मरूप
आत्मा ही मानों जगत्-शब्दों से व्यवहृत हुआ है, अतः जगद्रूप यह समस्त प्रपंच उसी आत्मा के प्रकाश
से प्रकाशित तथा उसीकी स्थिति से स्थित हे