Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verse 47
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, verse 47 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
आपातरमणीयं यद्यच्चापातसुदुःसहम् ।
तत्सर्वं सुसमं बुद्ध्वा नित्यात्मार्चाव्रतं चरेत् ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
जो आपाततः (ऊपर-ऊपर से यानी दृष्टिमात्र से) रमणीय (सुख
या सुखसाधन) प्रतीत होता हो ओर जो आपाततः दुःखरूप या दुःखसाधन प्रतीत होता हो, उस
सबको उक्त रीति से भली प्रकार समानरूप जानकर निरन्तर आत्मपूजास्वरूप व्रत का अनुष्ठान
करना चाहिए