Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verse 42
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, verse 42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
भोगानामनिषिद्धानां निषिद्धानां च सर्वदा ।
त्यागेन वातिरागेण स्वात्मानं शुद्धमर्चयेत् ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
शास्त्र से अनिषिद्ध और निषिद्ध भोगों के सर्वदा त्याग से अथवा कहीं अनिषिद्ध भोगों में राग से
शुद्धस्वरूप अपने आत्मदेव की पूजा करे (यहाँ पर पहला पक्ष मुख्य है ओर दूसरा पक्ष गौण है, यह
जानना चाहिए ।)