Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verse 36
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
समस्तैश्च समस्तानां चेष्टानां जगतः स्थितेः ।
मृतिजीवितस्वप्नाद्यैः प्राप्तैरात्मानमर्चयेत् ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी प्रकार दैव प्राप्त दुःखो का उपभोग करते समय भी आत्म-पूजा की ही बुद्धि करना चाहिए,
उद्वेग नहीं, यह कहते हैं।
आधियों एवं व्याधियों से व्याप्त, मोह तथा क्रोध से परिपूर्ण यथा प्राप्त समस्त उपद्रवों एवं दुःखों
से उस आत्मदेव की पूजा करे ॥ ३ ५॥ यथाप्राप्त जगत्सम्बन्धी समस्त चेष्टाओं के फलों से तथा जीवन,
मरण और स्वप्न आदि से उस आत्मदेव की पूजा करे