Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verses 34–35
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, verses 34–35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
कान्तान्नपानसंभोगसंभारादिविलासिना ।
सुखेन सर्वरूपेण संबुद्ध्याऽऽत्मानमर्चयेत् ॥ ३४ ॥
आधिव्याधिपरीतेन मोहसंरम्भशालिना ।
सर्वोपद्रवदुःखेन प्राप्तेनात्मानमर्चयेत् ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
स्त्री, अन्न,
पान आदि संभोग-सामग्री के विलास से युक्त सब प्रकार के सुखो से आत्मा को तत्त्वतः जानकर
उसकी पूजा करे । तात्पर्य यह है कि जब तक उसका ज्ञान नहीं होता, तब तक विषय-सुखो मे आसक्त
नहीं होना चाहिए