Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 39, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
विचित्राः शक्तयो बह्व्यो नानाचारा मनोदशाम् ।
उपासते मामनिशं पत्न्यः कान्तमिवोत्तमम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
बाह्यन्द्रियों की पृथक्-पृथक् व्यापारभूत, अतएव
चित्र-विचित्र अनेक रूप, रस आदि का ग्रहण करने में सामर्थ्यरूप शक्त्यो मेरी (समस्त इन्द्रियों में
शक्ति एवं प्राण देनवाले जीवात्मारूप देव की) उस प्रकार सेवा करती हैं, जिस प्रकार पत्नी अपने पति
की सेवा करती है