Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 38, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 38, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
विवर्तितजगज्जालः कालोऽस्य द्वारपालकः ।
सशैलभुवनाभोगमिदं ब्रह्माण्डमण्डलम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
पर्वतो एवं चोदह भुवनो के असीम विस्तार से युक्त यह ब्रह्माण्ड-मण्डल इस
आत्मदेव के किसी एक देहकोण में स्थित होकर उसके अंग में अवयवरूप हो गया है यानी उसका
एकदेश हो गया हे