Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 37, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 37, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
नानारसविलासाढ्यं विवर्ताभिनयान्वितम् ।
कल्पक्षणहतानेकपुष्करावर्तघर्घरम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके नृत्य में नाटक के लक्षण बतलाते है ।
वह नृत्य नाना प्रकार के करूणा आदि रस-विलासों से परिपूर्ण ओर विवर्तरूप अभिनय से समन्वित
है । प्रलय-क्षण में, जो कि उस नाट्य का उपसंहार काल है, विद्युत् के आघातों से बजाये गये
पुष्करावर्तनामक मेघ ही वाद्य-विशेषों का कार्य करते हैँ