Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 37, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 37, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
यैषा परपराभासा सैषा नियतिरुच्यते ।
क्रियाथ कृतिरिच्छा वा कालेत्यादिकृताभिधा ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
दो परार्धं कालरूप ओर अवान्तर कल्प तथा उसके
अवयवकालरूप जो यह मायाशक्ति है, वही नियति कही जाती हे । ईश्वर की क्रिया, कृति, इच्छा या
काल इत्यादि उसके नाम वादियों द्वारा रक्खे गये हैं हम लोग तो कलनामात्ररूप होने के कारण काल
ओर कल्पनारूप होने से कल्प - यों विकल्पप्रयुक्त ही उसके नाम मानते हैं