Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 37, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 37, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
शिवस्यास्य जगन्नाथ शक्तयः काः कथं स्थिताः ।
साक्षिता का च किं तासां वृत्तं स्यात्कियदेव तते ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
महर्षि वसिष्ठजी ने कहा : हे जगत् के स्वामिन्, इस सदाशिव की सामान्यतः कौन-सी शक्तियाँ हैं, वे
विशेषतः किस तरह से रहती हैं, उनकी क्या साक्षिता है, उनका वर्तन क्या हे ओर वह कितना है ?