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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 35, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 35, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 35 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

सा मूर्ता खादपि स्वच्छा सत्सत्तैवात्र कारणम् । विनश्यतः प्राणदेहौ वियोगान्मरुदेव च ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

उनमें क्रियाशक्ति का मूल ओर आश्रय दोनों नष्ट हो जाते हैं, परन्तु चितिशक्ति नष्ट नहीं होती, यह कहते है । वह चितिशक्ति अमूर्तं ओर आकाश से भी स्वच्छ हे । तीनों काल में कभी बाधित न होनेवाली उस चिति की सत्ता ही उसके अविनाश में हेतु हे । क्रियाशक्ति का मूल प्राण और क्रियाश्रय देह दोनों नष्ट हो जाते हैं और देहवियोग से ही प्राण वायुस्वरूप हो जाता हे