Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 34, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 34, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
शुद्धा निरंशा सत्या वाऽसत्या वेत्येवमादिभिः ।
विमुक्ता नामशब्दार्थैः सर्वैः सर्वात्मिकापि खम् ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
अव कलंकवर्जित स्थिति कहते हैँ ।
विमल, अवयवो से रहित, सत्य या असत्य इस तरह के भिन्न-भिन्न सभी कल्पित नाम-रूपों से
निर्मुक्त यह चिति, व्यवहार-काल में सम्पूर्ण नाम-रूपात्मक होती हुई भी, शून्यस्वभाव ही है