Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 34, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 34, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
एतन्मयमिदं विश्वं मुने तन्मयवेदनात् ।
सत्यसंवेदनान्नेदं न च नेदं मुनीश्वर ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुने, इस समस्त जगत् का उपादान वही
(तृतीयपदरूप देव) है, इस विज्ञान से यह समस्त विश्व तन्मय ही बन जाता हे । हे मुनीश्वर, उपादान
से अतीत अद्वितीय ब्रह्मतत्त्व के विज्ञान से यह नहीं है और यह नहीं भी नहीं हे यानी "अर्ति" और
“नास्ति' इन दोनों विकल्पों से वर्जित हे