Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 34, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 34, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
चिरमस्यां प्रतिष्ठायां सर्वाध्वाध्वगदूरगा ।
सा ममाप्यंग वचसां न समायाति गोचरम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
इस
भूमिका में जो चिरकाल तक स्थिति है, वह सब मार्गो से (शेवशास्त्रोक्त प्रसिद्ध छः मार्गो से ओर
श्रुतिप्रसिद्ध धूम्र, अर्चि आदि मार्गो से) तथा उन मार्गो के द्वारा अपनी-अपनी उपासनाओं के अनुसार
तत्-तत् लोक को प्राप्त हुए उपासको से भी दूरवर्ती है इसलिए हे मुने, मेरी भी वाणी का वह विषय
नहीं है, किन्तु वह स्वयं ही अनुभूत होती है