Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 34, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 34, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
सा परा परमा काष्ठा प्रधानं शिवभावतः ।
चित्येका निरवच्छेदा तृतीया पावनी स्थितिः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
वह सभी उत्तमोत्तम अवस्थाओं की परम अवधि है, परम मंगलरूप होने के कारण समस्त
मंगलो में प्रधान मंगल है, सर्वमुख्य विच्छेदशून्य चिति ही तृतीय पावनकारी स्थिति है