Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 33, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 33, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
तद्द्रव्यं प्राणिना भुक्तमाशु गच्छति वीर्यताम् ।
ततोऽहं प्राणवाञ्जातो वेत्तीत्यनुभवात्मकम् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
प्राणियों द्वारा खाया गया वह द्रव्य तत्काल ही धातुरूप (वृक्ष आदि में बीज आदि रूप) हो जाता हे ।
तदनन्तर अनुभवात्मक ब्रह्म ही स्त्रियों में सेचनक्रम से “में स्थूल देह स्वरूप हूँ” यों जानता है