Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 32, Verse 8

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 32, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

प्रविस्मृतस्वभावत्वाज्जीवोऽयं जडतां गतः । मोहाद्विस्मृतभावत्वाच्छूद्रतामिव सद्द्विजः ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

शंका हो कि यदि ब्रह्म का प्रतिबिम्ब ही जीव है तो उसे अज्ञान, निद्रा आलस्य आदि जाज्य का अनुभव कैसे होता है, सूर्य के प्रतिबिम्ब में अभास्वररूपता (अंधकार) का अनुभव कभी नहीं हो सकता तो इस पर कहते हैं। चूँकि यह जीव अपना विशुद्ध चैतन्यात्मक स्वरूप भूल गया है, इसलिए उसने उस प्रकार जडता प्राप्त की है, जिस प्रकार मोह से अपना स्वभाव भूल जाने के कारण अभक्ष्यभक्षण आदि में प्रवृत्त सवृब्राह्मण शूद्रता प्राप्त करता है