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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 32, Verse 20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 32, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

चिच्छक्तिः सर्वशक्तित्वान्नाहं चिदिति भावनात् । अत्र सैवैति वैवश्यं सूर्यो दीप्तैरिवाम्बुदैः ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

जिस प्रकार सूर्य दर्शक की दृष्टि में अपने ही द्वारा प्रकाशित हुए मेघो से अदर्शनीयता, मलिनता आदि विवशता प्राप्त करता है, उसी प्रकार सर्वशक्तिरूप होने पर भी वही चित्‌शक्ति मैं चित्‌ नहीं हूँ” इस भावना से इस देह में दीनता आदि विवशता प्राप्त करती है