Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 31, Verse 53
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 31, verse 53 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 31 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
प्राणसंबोधिता वेत्ति वेदनात्मतया जडे ।
नानास्फारसमुल्लासैर्यः पूर्वं परिवल्गति ।
प्राणेऽतीते त्वमननः स एवाशु न वेपति ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
जो देह जीवनदशा में अनेक विस्तृत चमकीले उल्लासो से व्यवहार
करती है, वही प्राण-वायु के चले जाने पर मन के न रहने से तत्क्षण ही कम्पनशून्य हो जाती है