Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 31, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 31, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 31 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
निर्विकल्पाद्वितीया चिद्यासौ सकलगा सती ।
परमैका परा साच्छा दीपिका तेजसामपि ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
केवल भावनामात्र का त्याग कर देने पर परम पुरुषार्थस्वरूप परमार्थ चिति सर्वत्र अनायास ही
सुलभ है, इसी आशय से उस चिति का वर्णन करते हैं।
निर्विकल्प, अद्वितीय, परब्रह्मस्वरूपिणी सर्वव्यापक होती हुई सकल तेजो को भी प्रकाशित
करनेवाली, स्वच्छ ओर अति उत्कृष्ट जो यह चिति है, वह पुरुष की केवल एक भावना से प्राप्तव्य
हे