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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 60

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, verse 60 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 60

संस्कृत श्लोक

चिदालोकं विना कस्य रसनाग्रे स्फुरन्नपि । कथं कदा प्रकटतामेति दृष्टः क्व वा रसः ॥ ६० ॥

हिन्दी अर्थ

कथित अर्थ का अनुभव कराने के लिए व्यतिरेकी दृष्टान्त से प्रसिद्ध उदाहरणों में समर्थन करते है। हे मुने, किसी व्यक्तिविशेष की जीभ के अग्रभाग में व्याप्त हो रहा भी रस चित्प्रकाश के विना किसी प्रकार किसी समय कहीं पर अनुभव में आता हो, ऐसा क्या देखा गया है ?