Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 45
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, verse 45 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 45
संस्कृत श्लोक
चिच्चतुर्दशभूतानां मण्डलानि महान्ति च ।
भूतीकरोति वारिश्रीः समुद्रस्वमिवाम्बुधिः ॥ ४५ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्मन्, जिस प्रकार रसशक्ति जलसमूहरूप
होकर समुद्र की स्वरूपसत्ता का सम्पादन करती है, उसी प्रकार चितिसत्ता भी चौदह भुवना में अवस्थित
भूतो के बड़े-बड़े समूहों की स्वरूपसत्ता का सम्पादन करती है