Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
चिन्मात्रमेव संसारसारः सकलसारताम् ।
गतः स देवः सर्वोऽहं तस्मात्सर्वमवाप्यते ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
एकमात्र चिदात्मा ही इस दृश्य संसार का सार है, इसलिये सकल सारभूत वस्तुओं की
भी साररूपता को प्राप्त हुआ वह परिपूर्ण देव ही मैं हूँ, उसीसे सब कुछ प्राप्त किया जाता है