Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 86
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, verse 86 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 86
संस्कृत श्लोक
संसारदुःखशान्त्यर्थं देवेनार्धेन्दुमौलिना ।
अस्तीन्दुकरसंभारभासुरः पारगो दिवः ॥ ८६ ॥
हिन्दी अर्थ
उसमें पहले कैलास का वर्णन करते हुए कथा का उपक्रम करते हैं।
चन्द्रमा के किरणसमूहों की नाईं भासमान कैलासनामक एक पर्वतों का राजा है। वह अपनी ऊँचाई
से आकाश को भी पार कर गया है और वह है - गौरीरमण भगवान श्रीशंकर का एक मन्दिर