Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 83
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, verse 83 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 83
संस्कृत श्लोक
यथोपलस्य घनता मानसादि तथात्मनः ।
सत्तामात्रादभिन्नत्वादभावादस्य संस्थितेः ॥ ८३ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार पत्थर का काठिन्य पत्थर से पृथक् अस्तित्व नहीं
रखता, उसी प्रकार समष्टि-व्यष्टयात्मक मन:समूह और तत्-तत् मन के कार्यभूत स्थूल प्रपंच भी
आत्मा से पृथक् अस्तित्व नहीं रखता, क्योकि सत्तामात्रस्वभाव आत्मा से अभिन्न होने के कारण इन
मन आदि की पृथक् अवस्थिति ही नहीं रह सकती