Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 77
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, verse 77 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 77
संस्कृत श्लोक
अन्ये नरमृगा मुग्धा जम्बूद्वीपे स्वजङ्गले ।
विहरन्ति यथा राम तथा मा विहरानघ ॥ ७७ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, दूसरे मनुष्य-मृग मुग्ध होकर
अपने अरण्यरूप जम्बूद्वीप में जिस प्रकार (विषयरूपी घास चरकर) विहार करते हैं, उस प्रकार हे
अनघ, रामभद्र, आप विहार मत कीजिए