Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 76
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, verse 76 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 76
संस्कृत श्लोक
अस्मिन्महीतलारण्ये चरन्ति मृगपोतकाः ।
त्वमज्ञानगजं भुक्त्वा सैंहीं वृत्तिमुपाश्रय ॥ ७६ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामभद्र, इस पृथ्वीतल के अरण्य में दूसरे अज्ञानी जीव, हिरन के बच्चों की नाई यदि
विषयरूप कोमल तिनके चर जाते हैं, तो उन्हें भले ही चर जाने दीजिए, परन्तु आप तो अज्ञानरूपी
हाथी का शिकार कर सिंह की वृत्ति धारण कीजिए