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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 56

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, verse 56 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 56

संस्कृत श्लोक

चित्तयक्षाभिभूतानां याः पुंसां विततापदः । शक्यन्ते परिसंख्यातुं न ता वर्षशतैरपि ॥ ५६ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामजी, चित्तरूपी यक्ष से पराजित हुए पुरुषों को जो बड़ी-बड़ी आपत्तियाँ प्राप्त होती हैं उनकी सैकड़ों वर्षों में भी गिनती नहीं की जा सकती (यहाँ अहंकार के स्थान में जो चित्तशब्द का प्रयोग किया गया है, उसका तात्पर्य यह है कि अन्यवृत्तियों में भी प्रकृत अहंकार ही अनर्थकारी है।)