Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 49
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, verse 49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
अहंकारोपहतया बुद्ध्या या क्रियते क्रिया ।
विषवल्ल्या इव फलं तस्याः स्यान्मरणात्मकम् ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
जब अहंकार से परिपूर्ण बुद्धि से कोई
क्रिया की जाती है, तब विषवल्ली के फल के सदृश उसका फल, कलह एवं जनशत्रुता के कारण,
मरणरूप ही प्राप्त होता हे