Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
अहंकारपिशाचेन ग्रस्ता ये निरयैषिणः ।
तेषां मोहमदान्धानां न मित्राणि न बान्धवाः ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
नरक की चाह रखनेवाले
जो जीव अहंकाररूपी पिशाच से आक्रान्त हैं, मोहरूपी मद से अन्धे उन जीवों के न कोई मित्र बनते हैं
ओर न कोई बन्धु ही (क्योकि अहंकारी जीवों में विनय की दुर्लभता और उद्धतता की अवश्यम्भाविता
होने से उनके साथ कोई प्रेम नहीं करता, यह तात्पर्य है ।)