Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 150
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, verse 150 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 150
संस्कृत श्लोक
स एष देवः कथितो यः परः परमार्थतः ।
यस्त्वं सोऽहमशेषं वा जगदेव च योऽखिलः ॥ १५० ॥
हिन्दी अर्थ
महर्षे, जो परमार्थतः सबसे श्रेष्ठ है, जो तुम्हारा, “तत् पदार्थ का, मेरा
तथा समस्त जगत का स्वरूपभूत है एवं जो स्वयं परिपूर्णस्वरूप है, ज्ञानरूप सामग्री से पूजा करने योग्य
उस देव का, प्रथम प्रश्न के उत्तर में, मैंने तुमसे कथन किया