Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 149
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, verse 149 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 149
संस्कृत श्लोक
याः काश्चन दृशो ये ये भावाभावास्त्रिकालगाः ।
सदेशकालचित्तास्तत्सर्वं चिद्व्योममात्रकम् ॥ १४९ ॥
हिन्दी अर्थ
जो कुछ विभिन्न-विभिनन दृष्टियाँ हैं तथा जो-जो तीनों कालों में रहनेवाले देश, काल
और चित्त से युक्त भावात्मक और अभावात्मक पदार्थ हैं, ये सब एकमात्र चैतन्यात्मक आत्मस्वरूप ही
हैं, उससे पृथक नहीं है